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LESSON 09



वनों की आवश्यकता तथा लाभ


277 words

वनों की आवश्यकता तथा लाभ

01 देश की उध्योगिक उन्नति हो रही है |

02 स्थान –स्थान पर नगरों के पास मिल – कारखानों की स्थापना की जा रही है |

03 इनकी चिमनियों से धुएं के रूप में कार्बन – डाई- ओक्साईड बड़ी मात्र में निकलती रहती है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है |

04 बसों, ट्रको, स्कूटरों तथा रेलयानो से भी हवा दूषित हो रही है, जो हमारे फेफड़ो में पहुचकर जीवन शक्ति को घटाकर शारीर को रोगों का घर बना रही है |

05 पेड़ो की पत्तियों की यह विशेषता है की वे कार्बन-डाई-ऑक्साइड को शुद्ध ओक्सिजन में बदल कर हमें जीवनदान देती है |

06 इस प्रकार वृद्ध दूषित हवा को शुद्ध करके हमारी बहुत बड़ी सेवा अनजाने में ही करते रहते हैं|

07 जब कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तथा रोग ठीक होने में नहीं आता तो डॉक्टर पहाड़ों पर जाकर वन सेवन करने को परामर्श देते हैं|

08 हरे-भरे वनों की शीतल हरियाली हमारे तन-मन को प्रसन्न कर देती है |

09 नेत्रों की ज्योति तथा शारीर को नवजीवन मिलता है |

10 मन शांत हो जाता है |

11 अनेक विटामिनों वाले मधुर फल खाने को मिलते है|

12 इन्ही सबकी कमी से तो अनेक रोग उतप्पन होते हैं |

13 अतः वन प्रक्रति देवी के असाधारण वरदान हिया डॉक्टर या वैध कोई रोग हो जाने पर रोगी को एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी आदि दवाए देते हैं |

14 ये जडीबुटी और दवाए हमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूपों से वनों से ही प्राप्त होती है|

15 इस प्रकार चिकित्सा क्षेत्र में वन सदा से मानव के परम मित्र रहे हैं |

16 भारत एक कृषि प्रधान देश है |

17 यहाँ की लगभग 84 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर निर्भर है |

18 इस प्रकार हमारे राष्ट्रिय संपत्ति है |

19 देश की आर्थिक विकास में इनका महान योगदान है |