☚ लेसन के लिए यहाँ क्लिक करे ।

LESSON 11



आध्यात्मिकता


340 words



01 मनुष्य के जीवन को दार्शनिकों ने दो पहलुओं में बाटा है- भौतिक और नैतिक |

02 ये दोनों हमारे जीवन के पूरक है |

03 एक के अभाव में हमारे जीवन पंगु हो जाएगा और हमारे जीवन में वह सरसता नहीं आ सकेगी, जो हमें प्रसन्नता दे सके शांति दे सके |

04 यही कारण है की जो मानव कठिनाइयों में भी आध्यात्मिकता का पल्ला थामे रहता है, उसे हम देवता का नाम देते है

05 और जब वह अति बौधाकता के कारण भौतिकवादी हो जाता हिया तब भी वह सामान्य लोगों से भिन्न हो जाता हिया इसलिए जीवन में इन दोनों का सदा महत्व स्वीकार करना ही पड़ता है|

06 आज हमारी आँखे, विघ्यान के चमत्कार से चकाचंध है |

07 हम मंगल लोक पर पहुच चुके है| हमारा हर कण और हर क्षण विघ्यान के प्रकाश से आलोकित है |

08 हमारी सभ्यता उन्नति के शिखर पर आसीन है फिर भी नैतिकता के अभाव में संसार में जहाँ-जहाँ अत्याचार, रंगभेद और जातिभेद की आग सुलग रही है और हम अतिभौतिकता से तंग आकर नैतिकता की क्षरण में बदले जा रहे है |

09 हिप्पियों का झुण्ड भौतिकता से तंग आकर नैतिकता की शरण में बदले जा रहे है |

10 महर्षि अरविन्द तथा योगियों की धक् हमें नैतिकता का अर्थ समझते दृष्टिगौचर होती है|

11 लेकिन इस विघ्यान की होड़ में उस स्थिति में नैतिकता का मूल्य समझती है |

12 जबकि उसको अपनाना हमारे लिए कठिन होता है |

13 शिक्षा बच्चो का ही नहीं देश, जाती और युगों का निर्माण करती है |

14 यह बल घुट्टी है| इसके साथ जो कुछ पिलाया जाएगा वह हमारे रक्त में समां जाएगा और उसका प्रभाव सदैव-सदैव के लिए हमारे जीवन पर रहेगा |

15 इसलिए हमरी शिक्षा के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण तथा आवश्यक है |

16 भारत एक प्रजातांत्रिक तथा धर्मनिरपेक्ष देश है |

17 इसका आधार कोई विशेष सम्प्रदाय या धर्मं नहीं, बल्कि सत्य पर आधारित कुछ ऐसे नियम तथा सिधांत है |

18 जिनके केवल नैतिकता का नाम ही सीमा है |

19 लेकिन उस सत्य, उसनैतिकता को पाठ्यक्रम में लाना ही अत्यंत महत्वपूर्ण पत्र है, तथा देश के निर्माण हेतु एक प्रशासनिक कार्य है |

20 मूल्याकन केवल भविष्य में ही कर सकेगा|